भारत में लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 कर दी गई है ।

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भारत में लड़कियों की शादी की उम्र
भारत में लड़कियों की शादी की उम्र

भारत में अब लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 कर दी गई है . पहले भारत में लड़कियों की शादी की उम्र न्यूनतम 18 साल थी पर अब इसमें संशोधन करके इसे 21 साल कर दिया गया है इसे कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है बस अब इसमें संशोधन करके इसे कानूनी रूप से लागू करना है

भारत में लड़कियों की शादी की उम्र सही क्या है. ?

कैबिनेट ने महिलाओं के लिए शादी की कानूनी उम्र 18 से बढ़ाकर 21 करने का प्रस्ताव पारित किया और केंद्र इस सप्ताह संसद में पुरुषों के समान महिलाओं के लिए विवाह योग्य उम्र बढ़ाने के लिए विधेयक पेश कर सकता है।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 को संबोधित इस स्वतंत्रता दिवस के दौरान योजना की घोषणा की।

वर्तमान समय में हिंदू विवाह अधिनियम 1955 और बाल विवाह निषेध अधिनियम 1954 के अनुसार लड़कों के लिए महिला की आयु 18 वर्ष और 21 वर्ष है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीताराम ने कहा था कि 1978 में तत्कालीन शारदा अधिनियम 1929 में संशोधन करके महिलाओं की शादी की उम्र 15 साल से बढ़ाकर 18 साल कर दी गई थी।

भारत में लड़कियों की शादी की उम्र के विषय पर इतिहास

1.शारदा अधिनियम 1929

शारदा अधिनियम जिसे मुख्य रूप से बाल विवाह निरोधक अधिनियम के रूप में जाना जाता था लाई ईसवी के वायसराय के दौरान परिता लागू किया गया था इस अधिनियम में लड़कियों की उम्र 13 वर्ष तथा लड़कों की शादी योग्य उम्र 18 वर्ष लागू की गई थी या कानून मैं केवल हिंदुओं के लिए था। वरनू पूरे ब्रिटिश भारत पर या पारित किया गया था या अधिनियम 28 सितंबर 1929 को भारतीय शाही विधान परिषद में पारित हुआ जिसके तहत महिलाओं की न्यूनतम शादी उम्र 14 निर्धारित की गई थी।

2. विशेष विवाह अधिनियम 1954

विशेष विवाह अधिनियम 1954 भारत की सांसद का एक अधिनियम है जिसके अंतर्गत भारत कि नागरिकों और विदेशों के सभी भारतीय नागरिकों के लिए नागरिक विवाह का प्रावधान है भले ही किसी भी पक्ष द्वारा धर्म का अनुसरण क्यों ना किया जा रहा हो इस अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार का धार्मिक औपचारिकता को पूरा करने की आवश्यकता नहीं है

एक व्यक्ति जो विश्व विवाह अधिनियम के तहत शादी करता है और फिर पति धर्म में धर्मप्रीत होता है वह विवाह के विधटन के लिए व्यक्तिगत कानून के बजाय परिवारिक न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को लागू करने का हकदार होता है दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है।

अधिनियम के तहत लड़कियां अट्ठारह में और लड़के 21 वर्ष में शादी कर सकते हैं।

3. संशोधन अधिनियम 1978

या अधिनियम को बाल विवाह निरोध संशोधन अधिनियम 1978 कहां जा सकता है।

वर्तमान संदर्भ में पुरुषों और महिलाओं की हेतु विवाह की न्यूनतम उम्र बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार उठाया गया था जब देश में जनसंख्या वृद्धि को रोकने की तत्काल जरूरत थी और है जिसके लिए सारी उम्र बढ़ाना अति आवश्यक हो गया था जिससे विवाहित जीवन की अवैध काम हो सके तथा न्यूनतम विवाह का परिणाम कुल प्रधनन दर को बढ़ा रहा था।

25 अगस्त 1976 को लोकसभा में इस उद्देश के लिए पेश किया गया बिल 18 जनवरी को लोकसभा विधटन के साथ समाप्त हो गया इस मामले की जांच की गई और इसके सभी पहलुओं की फिर से जांच की जा रही है।

4. बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006

भारत में बाल विवाह निषेध अधिनियम 1 मार्च 2004 को पारित हुआ बिल विवाह को विवाह के रूप में परिभाषित करता है जिसमें था तो लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम तथा लड़का 21 वर्ष से छोटा हो

इस अधिनियम का पारित उद्देश बाल विवाह और इससे संबंधित मामलों का पूर्ण रुपेश से उन पर प्रतिबंध लगाना है व यह तय करना भी है कि समय के अंदर पीड़ितों को राहत देने और ऐसे विवाह को साथ देने या साथ बढ़ाने वालों के लिए कानूनी करवाई के जैसे नियम को लागू करवाता है जोकि 21 खंड में है याद जम्मू और कश्मीर तथा पांडिचेरी के केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू नहीं होता है।

भारत में लड़कियों की शादी की उम्र के आधार पर धार्मिक मान्यताओं में अंतर

हिंदूइस्लाम या मुसलमानईसाई
हिंदू में हिंदू विवाह अधिनियम 1955 जहां लड़कियों की न्यूनतम वर्ष अट्ठारह और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित हैइस्लाम में यैवन हो गई लड़कियों विवाह माननीय माना जाता है
इस प्रकार लड़कियों की उम्र इस्लाम में तय नहीं की गई है
1872 का ईसाई विवाह अधिनियम जैसा कि अन्य भारतीय विवाह अधिनियम में लागू है
दूल्हे के लिए वर्ष 21 तथा दुल्हन के लिए 18 वर्ष निर्धारित है

इस तरह से हम यह देख सकते हैं कि अभी धार्मिक मान्यताओं में विवाह के लिए नियम अलग-अलग है

भारत में लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बड़ा करे के करने के पीछे के महत्वपूर्ण कारण क्या है ?

समिति ने सिफारिश की है कि महिलाओं की विवाह की उम्र बढ़ाकर 21 साल किया जाए

1. लिंग भेदभव

आज हम लोग 21 वी शताब्दी में रह रहे हैं फिर भी लिंग भेदभाव अभी भी विद्वान है जिसमें लड़कियों को आगे बढ़ने से रोका जाता है लड़कियों के साथ संस्कृति समाजिक आर्थिक और साथ ही साथ विवाहित स्तर पर भेदभाव किया जा रहा है।

इसी भेदभाव की खाई को खत्म करने के लिए कैबिनेट में लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 की बिल को पास कर दिया गया है

इस तरह से हमारे सरकार सम्मान रुकता ला सकते हैं जिसका मतलब सम्मान सिविल कोड जा वास्तविकता में लिंग भेदभाव को मिटा के लिंग समानता को जन्म देगा।

2. शिक्षा पर प्रभाव

भारत में लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाकर सरकार लड़कियों को अपना भविष्य बनाने तथा अपने पैरों पर खड़े होने के अल्प अवधि को बढ़ा रही। जिससे भेदभाव होने के महत्वपूर्ण कारण अधिकृत भेदभाव खत्म हो जाएगा।

जल्दी शादी करने से लड़कियों में पढ़ाई अक्सर बीच में छूट जाती है जिससे उन्हें आर्थिक रूप से अपने पिता पर निर्भर होना पड़ता है जिससे हम लड़कियां फैसला ले नहीं पाती की क्या सही है क्या गलत है जो उन्हें अपनी आत्म सम्मान बचाए रखेगी और समाज में एक स्थान मिलेगा।

3. स्वास्थ्य पर प्रभाव

जल्दी शादी करने वाले घरेलू हिंसा खराब मानसिक स्वास्थ्य और कपूर सन के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं

उन्हें संकुचन और स्वास्थ्य देखभाल तक सीमित पहुंच होने की भी अधिक संभावना है।

कम आयु में विवाह और जिस से जल्दी कर अवस्था का माताओं और उनके बच्चों के पोषण स्तर व उनके सभी स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है

लड़कियां लड़ती है और अभी भी एक उपायुक्त भविष्य बनाने से पहले शादी के खिलाफ लड़ रही हैं

राजस्थान मे 1200 से अधिक लड़कियों ने बाल विवाह के खिलाफ एक आंदोलन शुरू किया जो कोविड-19 मारी के दौरान फैल गया।

लड़कियों द्वारा 18 से 21 तक उम्र बढ़ने पर काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया हो रही है हम लड़कियां बिल का पूरा समर्थन करते हैं।

कानूनी रूप से अब हमें वास्तविक समानता देने के लिए सरकार की अभारी हु ।

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